लखनऊ। चक गंजरिया स्थित कल्याण सिंह कैंसर संस्थान (Kalyan Singh Cancer Institute) में गरीब मरीजों के लिए एक बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है। यहाँ सरकारी मदद से चलने वाली ‘असाध्य रोग योजना’ (Asadhya Rog Yojana) का बजट पूरी तरह खत्म हो चुका है। पैसे न होने के कारण सैकड़ों गरीब कैंसर मरीजों का इलाज बीच में ही लटक गया है। स्थिति यह है कि शासन की सुस्ती के चलते मरीज अब दर्द और लाचारी में भटकने को मजबूर हैं।
1 करोड़ का बजट स्वाहा, 5 करोड़ की फाइल अटकी
संस्थान के अधिकारियों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2024-25 में शासन ने असाध्य योजना के तहत मरीजों के इलाज के लिए 1 करोड़ रुपये का बजट जारी किया था। मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण यह बजट अब खत्म हो चुका है। प्रशासन का कहना है कि उन्होंने 5 करोड़ रुपये की अतिरिक्त मांग का प्रस्ताव शासन को भेजा है और कई बार रिमाइंडर (Reminder) भी दिया है। लेकिन एक महीना बीत जाने के बाद भी न तो बजट आया और न ही कोई सुनवाई हुई।
रेडियोथेरेपी और कीमोथेरेपी रुकी बजट खत्म होने का सीधा असर उन मरीजों पर पड़ रहा है जो अपनी जेब से महंगा इलाज नहीं करा सकते।
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कई मरीजों की कीमोथेरेपी (Chemotherapy) की डोज रोक दी गई है।
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महंगी रेडियोथेरेपी (Radiotherapy) की तारीखें आगे बढ़ाई जा रही हैं।
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PET Scan और CT Scan जैसी ज़रूरी और महंगी जांचें भी पैसों की कमी से नहीं हो पा रही हैं।
रोजाना 500 मरीजों की ओपीडी
कल्याण सिंह कैंसर संस्थान पर प्रदेश भर के मरीजों का भार है। यहाँ ओपीडी में प्रतिदिन 500 से अधिक मरीज आते हैं और लगभग 300 बेड की क्षमता वाला यह अस्पताल अक्सर भरा रहता है। सितंबर 2022 से शुरू हुई असाध्य योजना में अब तक 130 से अधिक मरीज पंजीकृत हैं, जिनका जीवन अब खतरे में है।
अधिकारी तो पत्र लिखकर जिम्मेदारी पूरी कर चुके हैं, लेकिन शासन स्तर पर फाइल अटकने से कैंसर जैसे गंभीर रोग से जूझ रहे मरीजों की जान पर बन आई है।
