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अभिभावकों को बहका रहे अधिकारी, शिक्षकों पर बना रहे दबावः वीरेंद्र सिंह

विद्यालयों को मर्जर व पेयरिंग करने के लिए तरह-तरह से अभिभावकों पर बनाया जा रहा दबाव, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने ज्ञापन देकर जताया विरोध कहा, मर्जर का निर्णय वापस लिया जाए

RAEBARELI: परिषदीय विद्यालयों के जबरन मर्जर को लेकर शिक्षा विभाग और शिक्षक संगठनों के बीच टकराव गहराता जा रहा है। बिना अभिभावकों और विद्यालय प्रबंध समितियों (एसएमसी) की सहमति के हो रही पेयरिंग प्रक्रिया के खिलाफ गुरुवार को राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) को ज्ञापन सौंपा और चेतावनी दी कि अगर अधिकारियों की मनमानी पर रोक नहीं लगी, तो संगठन को धरना-प्रदर्शन के लिए बाध्य होना पड़ेगा।

संघ के जिलाध्यक्ष वीरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि अभिभावकों से सहमति लेने के लिए अधिकारी तरह-तरह के बहाने बना रहे हैं। कोई अधिकारी अभिभावकों से यह कह रहा है कि आपके बच्चों के लिए गांवों से ले जाने के लिए गाड़ी लगाई जाएगी तो कोई कह रहा है कि गांव में अब तीन साल से छह साल के बच्चे पढ़ाएं जाएंगे जबकि हकीकत में अभी कुछ नहीं है।

विद्यालय प्रबंध समितियों के न चाहने के बाद भी अधिकारी जबरदस्ती ही विद्यालयों को मर्जर कर दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि कम नामांकन छात्र संख्या वाले परिषदीय विद्यालयों का अन्य विद्यालयों के साथ युग्मन, विलय, मर्जर किए जाने के खिलाफ राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ है। बेसिक शिक्षा के लाखों छात्र एवं शिक्षकों का भविष्य इस युग्मन (मर्जर) से प्रभावित हो रहा है।

School Merger

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पूर्व शिक्षक नेता गणेश बक्श सिंह ने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने से प्रत्येक गांव में स्कूल स्थापित हुए और शिक्षा प्रत्येक बच्चे को अनिवार्य रूप से सुलभ हो गयी। अब विद्यालयों के युग्मन व मर्जर से विद्यालय बच्चों की पहुंच से दूर हो जाएंगे और अधिनियम की धारा 6 का अस्तित्व समाप्त हो जायेगा तथा यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रावधान का भी उल्लंघन है।

कार्यकारी अधिकारी संजय सिंह, संगठन मंत्री मधुकर सिंह और संयुक्त मंत्री हरिमोहन यादव ने कहा कि प्रमुख सचिव ने 16 जून को आदेश जारी करके युग्मन से पूर्व जनसमुदाय, स्थानीय प्राधिकारी तथा शिक्षक संघ से संवाद स्थापित कर सहमति प्राप्त होने पर ही युग्मन/मर्जर प्रक्रिया आरम्भ की जाए। लेकिन खण्ड शिक्षा अधिकारियों ने युग्मन/मर्जर के सम्बन्ध न तो अभिभावकों से और न ही शिक्षक संघों से किसी प्रकार का संवाद स्थापित करना आवश्यक समझा है। उन्होंने मनमाने पूर्ण ढंग से युग्मन/मर्जर करने की होड़ में खण्ड शिक्षा अधिकारी लग गए।

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कार्यक्रम का संचालन कर रहे जिला महामंत्री ने कहा कि संगठन के संज्ञान में यह भी लाया गया है कि कतिपय खण्ड शिक्षा अधिकारी ने कम नामांकन की छात्र संख्या का निर्धारण स्वयं से करते हुए सम्बन्धित विद्यालय प्रबन्ध समिति की सहमति के बिना ही प्रस्ताव आपके कार्यालय को प्रेषित कर दिया। यह पूरी तरह से गलत है और इसका हम लोग विरोध करते हैं।

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शिक्षक नेता अनुराग मिश्रा, वेद प्रकाश यादव और दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि खण्ड शिक्षा अधिकारी कम नामांकन छात्र संख्या वाले विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को विभिन्न दूरभाष नम्बरों से फोन करके युग्मन व मर्जर का प्रस्ताव लाने के लिए दबाव बना रहे हैं तथा प्रस्ताव न लाने की दशा में धमकी दे रहे हैं।

शिक्षक नेता वीरेंद्र चौधरी , शशिदेवी,अनूप सिंह, बृजेन्द्र कुमार और अवनीश सिंह, जयकरन, राकेश गौतम ने कहा कि खण्ड शिक्षा अधिकारियों के प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष संरक्षण में परिषदीय विद्यालयों के नजदीक भविष्य मे छात्रों की स्थिति का आकलन किये बगैर मान्यता प्राप्त तथा गैर मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों का संचालन हो रहा है। जो परिषदीय विद्यालयों में नामांकन कम होने का सबसे प्रमुख कारण है। उन्होंने कहा कि अब जिला बेसिक शिक्षाधिकारी इस पर संज्ञान नहीं लेते हैं तो फिर संगठन बीएसए कार्यालय के सामने धरना प्रदर्शन करेगा।

इस मौके पर वीरेंद्र सिंह, रामेश्वर नाथ, दिलीप चौधरी, जय सिंह, अमित मिश्रा, प्रतिमा सिंह, मीना तिवारी, वंदना पाण्डेय, सुरेश यादव, सतीश चौरसिया, सन्तन श्रीमौली, संतोष सिंह, हेमलता, प्रभा गुप्ता, पंकज सिंह, राजेंद्र, रामभरत, रमेश, वरूणेंद्र सिंह, कमलेश यादव आदि शिक्षक मौजूद रहे।

Sunil Yadav

संपादक, लेखक और अनुभवी पत्रकार हैं। वे दैनिक जागरण, आईनेक्‍स्‍ट, कैनविज टाइम्‍स और दैनिक जागरण आईनेक्‍स्‍ट से जुड़े रहे हैं। वह मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश की राजनीति, प्रशासनिक ख़बरों, स्वास्थ्य सेवाओं, टेक्‍नोलॉजी से जुड़े विषयों पर लिखते हैं। ट्विटर (X) पर उनसे @sunilyadav21 पर जुड़ सकते हैं।

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