KGMU: निमोनिया एक गम्भीर समस्या, 5 वर्ष से कम आयु के बच्चे एवं बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित, इन उपायों से हो सकता है बचाव
निमोनिया से बाल उत्तरजीविता खतरे में, KGMU के विशेषज्ञों ने UP में मृत्यु दर पर ज़ाहिर की चिंता

LUCKNOW: निमोनिया (Pneumonia) से पांच वर्ष से कम आयु के बच्चे और बुजुर्ग सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। पांच वर्ष से कम उम्र के करीब 26 प्रतिशत बच्चों की मौत का कारण निमोनिया ही होता है। जबकि बच्चों को इस घातक निमोनिया के खतरों से बचाया जा सकता है। बचाव के लिए बच्चों को अच्छे पोषण, स्वच्छ हवा, टीकाकरण और समय पर इलाज जरूरी है। कुपोषित बच्चे आसानी से निमोनिया की जद में आ जाते हैं। यह जानकारी केजीएमयू (KGMU) में पल्मोनरी मेडिसिन एंड क्रिटिकल केयर विभाग Pulmonary Medicine and critical care medicine) के अध्यक्ष डॉ. वेद प्रकाश (Dr Ved Prakash) ने दी।
विश्व निमोनिया दिवस (World Pneumonia Day) के अवसर पर विभाग में आयोजित जागरुकता कार्यक्रम में डॉ. वेद प्रकाश ने बताया कि निमोनिया घातक संक्रमण है। इसमें बच्चे को सर्दी-जुकाम, बुखार होता है। फिर सांस फूलने लगती है। उल्टियां होती हैं। समय पर इलाज से बीमारी काबू में आ सकती है। इलाज में देरी घातक और घातक है। उन्होंने बताया कि गंभीर मरीजों को एंटीबायोटिक्स और ऑक्सीजन देने की जरूरत पड़ती है।
डॉ. वेद प्रकाश ने जोर देकर कहा कि “प्रारंभिक निदान, टीकाकरण और शिक्षा निमोनिया के विरुद्ध हमारे सबसे मजबूत हथियार हैं।“ निमोनिया से बचाव, त्वरित पहचान और समय पर इलाज जीवन दान साबित हो सकता है।
केजीएमयू (KGMU) रेस्पीरेटरी मेडिसिन (Respiratory Medicine) विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद (Dr Rajendra) ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भारत के 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों का लगभग 18 प्रतिशत हिस्सा है। वहीं गंभीर निमोनिया के लगभग 24 प्रतिशत हिस्सेदारी है। पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में निमोनिया से होने वाली मृत्यु का लगभग 26 प्रतिशत योगदान है।
उन्होंने बताया कि हॉस्पिटल मैनेजमेंट इनफॉरमेशन सिस्टम के वर्ष 2022-23 के आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में निमोनिया के कारण 452 मृत्यु हुईं थी। प्रेस वार्ता में प्रो. (डॉ.) वेद प्रकाश के साथ प्रो. (डॉ.) राजेन्द्र प्रसाद, पूर्व निदेशक, VPCI नई दिल्ली] प्रो. (डॉ.) आर.ए.एस. कुशवाहा (रेस्पिरेटरी मेडिसिन), प्रो. (डॉ.) राजेश यादव (बाल रोग) और प्रो. प्रशांत गुप्ता (माइक्रोबायोलॉजी) सहित कई डॉक्टर मौजूद रहे।

निमोनिया (Pneumonia) के लक्षण व बचाव
सर्दी-जुकाम, खांसी, बुखार, सांस लेने में दिक्कत, छाती में दर्द इसे प्रमुख लक्षण हैं। निमोनिया से बचाव के लिए टीकाकरण करवाएं, स्वच्छता का ध्यान रखें, पौष्टिक आहार लें, धूम्रपान से बचें।
उत्तर प्रदेश (UP) में निमोनिया की स्थिति चिंताजनक
- UP में भारत के पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चों का लगभग 18% हिस्सा है, लेकिन यह गंभीर निमोनिया के लगभग 24% और इस आयु वर्ग में निमोनिया से होने वाली मृत्यु का लगभग 26% का योगदान देता है।
- HMIS (2022-23) के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में बाल निमोनिया के 92,887 मामले सामने आए और 1-5 वर्ष आयु वर्ग में निमोनिया के कारण 452 मृत्यु हुईं।
- 2015 में उत्तर प्रदेश में पाँच साल से कम उम्र के बच्चों में निमोनिया के 565 मामले प्रति 1,000 बच्चों पर होने का अनुमान था।
निमोनिया का भयावह बोझ
- बाल मृत्यु दर: एक अनुमान के अनुसार, 2019 में पाँच साल से कम उम्र के बच्चों की लगभग 14% मृत्यु निमोनिया के कारण हुई थी, जिससे विश्व स्तर पर लगभग 6 लाख 10 हजार बच्चों की मृत्यु हुई – यानी लगभग प्रतिदिन 2000 बच्चे। यूनिसेफ के अनुसार, हर 39 सेकंड में एक बच्चे की निमोनिया से मृत्यु हो जाती है।
- वयस्कों पर प्रभाव: वैश्विक स्तर पर, 70 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में लगभग 6 में से 1 मौत का कारण निमोनिया है।
- आर्थिक बोझ: निमोनिया का आर्थिक बोझ काफी है। वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य देखभाल लागत, उत्पादकता हानि और दीर्घकालिक परिणामों के कारण हर साल लगभग ₹1,41,100 करोड़ से ₹2,49,000 करोड़ का व्यय होने का अनुमान है। भारत में, पाँच साल से कम उम्र के बच्चों में निमोनिया के इलाज से जुड़ी स्वास्थ्य देखभाल लागत सालाना लगभग ₹3,000 करोड़ होने का अनुमान है।
- एंटी-माइक्रोबियल प्रतिरोध: विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का अनुमान है कि एंटी-माइक्रोबियल प्रतिरोध (AMR) के कारण 2050 तक सालाना 1 करोड़ मृत्यु हो सकती हैं, जिसमें निमोनिया एक प्रमुख कारण रहेगा।
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