15 साल बाद घर में गूंजी किलकारी, IVF से बच्ची का जन्म

क्वीनमैरी हॉस्पिटल की IVF यूनिट का सफल प्रयास
लखनऊ। करीब 15 वर्षों से संतान की उम्मीद लगाए एक दंपति के घर आखिरकार किलकारी गूंजी। KGMU के क्वीनमैरी (Queen Mary) हॉस्पिटल की IVF यूनिट के विशेषज्ञों के प्रयास से 38 वर्षीय महिला ने स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। 20 सितंबर को हुए सीजेरियन प्रसव के बाद करीब दो किलोग्राम वजन की बच्ची के जन्म से परिवार की वर्षों पुरानी मुराद पूरी हो गई। मां और बच्ची दोनों स्वस्थ हैं।
IVF यूनिट की हेड डॉ. पुष्पलता शंखवार ( Dr. Pushpalata Shankhwar) के नेतृत्व में महिला का उपचार किया गया। डॉ. पुष्पलता ने बताया कि महिला करीब 15 वर्षों से संतान प्राप्ति के लिए प्रयासरत थीं। इस दौरान उन्होंने कई चिकित्सकों से परामर्श लिया और विभिन्न उपचार भी कराए, लेकिन सफलता नहीं मिली। लंबे समय तक संतान न होने के कारण परिवार उम्मीद और इंतजार के बीच था।
बंद थीं फैलोपियन ट्यूब, IVF से मिली उम्मीद
करीब एक वर्ष पहले महिला ने क्वीनमैरी हॉस्पिटल की IVF यूनिट में संपर्क किया। विशेषज्ञों की टीम ने विस्तृत जांच के बाद पाया कि उनकी फैलोपियन ट्यूब बंद थीं। चिकित्सकीय स्थिति को देखते हुए IVF को उपचार का उपयुक्त विकल्प माना गया। मरीज और परिजनों की सहमति के बाद IVF प्रक्रिया शुरू की गई।
उपचार के बाद महिला गर्भवती हुईं और गर्भावस्था की नियमित निगरानी की गई। गर्भावस्था पूरी होने के बाद 20 सितंबर को सीजेरियन सेक्शन के माध्यम से प्रसव कराया गया। करीब दो किलोग्राम वजन की स्वस्थ बच्ची के जन्म के साथ ही ऑपरेशन थिएटर में खुशी का माहौल बन गया। मां और नवजात दोनों की हालत सामान्य बताई गई है।
वर्ष 1993 में शुरू हुई थी आईवीएफ यूनिट
क्वीनमैरी हॉस्पिटल में IVF यूनिट की शुरुआत वर्ष 1993 में डॉ. लक्ष्मी सिंह के प्रयासों से हुई थी। कुछ समय बाद यूनिट बंद हो गई। वर्ष 2009 में इसे दोबारा शुरू किया गया, लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी। कोविड काल में यूनिट की सेवाएं पूरी तरह प्रभावित हो गईं। इसके बाद यूनिट को दोबारा सक्रिय करने के प्रयास किए गए। वर्तमान सफलता को कोविड के बाद क्वीनमैरी की IVF यूनिट की पहली सफल IVF गर्भावस्था और प्रसव के रूप में देखा जा रहा है।
समय पर कराएं बांझपन का उपचार: डॉ. पुष्पलता शंखवार
डॉ. पुष्पलता शंखवार ने बताया कि देर से विवाह, करियर और बदलती जीवनशैली समेत कई कारणों से बांझपन की समस्या के मामले सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि नियमित प्रयास के बावजूद गर्भधारण नहीं हो रहा है तो उपचार के लिए बहुत अधिक इंतजार नहीं करना चाहिए। उन्होंने बताया कि आधुनिक तकनीक के आने से IVF उपचार की संभावनाएं पहले की तुलना में बेहतर हुई हैं। क्वीनमैरी की IVF यूनिट में आधुनिक असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) के माध्यम से नि:संतान दंपतियों के उपचार को आगे बढ़ाया जाएगा। इसमें IVF, ICSI और अन्य उन्नत तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। डॉ. पुष्पलता ने कहा कि लंबे समय से संतान की प्रतीक्षा कर रहे दंपतियों के लिए आधुनिक प्रजनन तकनीकें नई उम्मीद का माध्यम बन सकती हैं।
ताज़ा खबरें सबसे पहले पाएं
WhatsApp Channel, Google News और सोशल मीडिया पर फॉलो करें




