कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का बड़ा ऐलान: सितंबर से शुरू होगा ‘क्या बोलती पब्लिक’ कैंपेन

छत्रपति संभाजीनगर (महाराष्ट्र): कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने एक बड़े देशव्यापी अभियान की घोषणा की है। इस अभियान का नाम ‘क्या बोलती पब्लिक’ रखा गया है। इसकी शुरुआत सितंबर महीने से होगी। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने गुरुवार को यह अहम ऐलान किया।
उन्होंने महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। यह प्रेस कॉन्फ्रेंस सीजेपी की दो दिवसीय ‘कोर टीम’ बैठक के बाद हुई। इस रणनीति बैठक को ‘कॉकरोच कॉन्क्लेव’ (Cockroach Conclave) नाम दिया गया था।
गांव-शहर जाकर युवाओं से होगा सीधा संवाद
अभिजीत दीपके ने अभियान की रूपरेखा साझा की। उन्होंने कहा कि सीजेपी के कार्यकर्ता पूरे देश का दौरा करेंगे। वे सीधे युवाओं, छात्रों और अभिभावकों से संवाद स्थापित करेंगे।
इस दौरान लोगों की समस्याओं, शिकायतों और उम्मीदों को समझा जाएगा। दीपके ने कहा, “देश की 65 फीसदी आबादी 35 साल से कम उम्र की है। फिर भी नेता, राजनीतिक दल और सरकारें युवाओं के भविष्य, शिक्षा और रोजगार पर गंभीरता से बात नहीं कर रही हैं।”
बेरोजगारी और महंगी शिक्षा हैं मुख्य मुद्दे
‘क्या बोलती पब्लिक’ कैंपेन का फोकस कई गंभीर मुद्दों पर होगा:
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बेरोजगारी: दीपके ने इसे देश की सबसे बड़ी समस्या बताया। उन्होंने कहा कि 80 फीसदी बेरोजगारों के पास डिग्री है। युवाओं को मजबूरी में डिलीवरी बॉय का काम करना पड़ रहा है।
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शिक्षा का बाजारीकरण: सीजेपी ने स्कूलों, कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों की भारी-भरकम फीस पर चिंता जताई। दीपके ने कहा कि शिक्षा एक मौलिक अधिकार है। लेकिन, अब इसे सिर्फ मुनाफा कमाने का जरिया बना दिया गया है।
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संस्थाओं पर घटता भरोसा: न्यायपालिका, मीडिया और चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं में जनता का भरोसा कम हो रहा है। सीजेपी का मानना है कि मीडिया को सत्ता से कड़े सवाल पूछने चाहिए।
राजनीतिक पार्टी नहीं, ‘प्रेशर ग्रुप’ रहेगी सीजेपी
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीजेपी के राजनीतिक भविष्य पर भी स्थिति साफ की गई। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने अफवाहों को खारिज करते हुए कहा कि सीजेपी चुनाव नहीं लड़ेगी। यह कोई आधिकारिक राजनीतिक दल नहीं बनेगी।
उन्होंने कहा कि देश में पहले से ही कई राजनीतिक दल हैं। इसलिए एक नई पार्टी बनाने का कोई मतलब नहीं है। हम सिर्फ एक ‘पब्लिक प्रेशर ग्रुप’ (जन दबाव समूह) के रूप में काम करेंगे। उनका मकसद जमीनी स्तर पर काम करके सरकार की जवाबदेही तय करना है।
नीट आंदोलन से बनी थी अलग पहचान
सीजेपी हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए बड़े प्रदर्शन से चर्चा में आई थी। उन्होंने नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक मामले को लेकर लगातार 36 दिनों तक धरना दिया था। दीपके का दावा है कि इस आंदोलन ने पिछले 10-12 सालों से देश में बने डर के माहौल को खत्म कर दिया। तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को सीजेपी अपनी बड़ी कामयाबी मानती है।
संगठन में इन्हें मिली जिम्मेदारी
अभियान की घोषणा के साथ ही सीजेपी ने अपने संगठनात्मक नेतृत्व का भी ऐलान किया। अभिजीत दीपके को संगठन का कन्वीनर (संयोजक) बनाया गया है। वहीं, आशुतोष रांका और सौरव दास को को-कन्वीनर (सह-संयोजक) की जिम्मेदारी दी गई है। सीजेपी की विचारधारा डॉ. बी.आर. आंबेडकर, महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू के आदर्शों और संविधान पर आधारित होगी। संगठन ने अपनी वेबसाइट के जरिए एक राष्ट्रव्यापी मेंबरशिप ड्राइव (सदस्यता अभियान) भी शुरू किया है।





