लखनऊ के सिविल डॉक्टर्स ने की जटिल न्यूरोसर्जरी, स्पाइन टीबी के मरीज को पैरालिसिस से बचाया

लखनऊ: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी (सिविल) अस्पताल, लखनऊ ने चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ा मुकाम हासिल किया है। अस्पताल में न्यूरोसर्जन की तैनाती के बाद पहली बार कोई गंभीर न्यूरोसर्जरी (Neurosurgery) सफलतापूर्वक की गई है। इस जटिल सर्जरी ने स्पाइन टीबी से जूझ रहे एक मरीज को हमेशा के लिए अपाहिज होने से बचा लिया है।
अस्पताल के निदेशक डॉ. जी.पी. गुप्ता ने इस कामयाबी के लिए पूरी टीम को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पताल में ऐसी जटिल सर्जरी का होना मरीजों के लिए बहुत बड़ी राहत है।
पैरालिसिस का था गंभीर खतरा
मरीज विनय तिवारी (37 वर्ष) सिद्धार्थनगर जिले के मधुकरपुर गांव के रहने वाले हैं। वह पिछले डेढ़ साल से कमर के भयंकर दर्द से परेशान थे। उन्हें टीबी की बीमारी भी थी। तकलीफ बढ़ने पर उन्होंने सिविल अस्पताल के न्यूरोसर्जन डॉ. विनोद कुमार तिवारी को दिखाया।
जांच और MRI में बड़ी परेशानी सामने आई। मरीज की रीढ़ की हड्डी (L3 vertebra) में टीबी इन्फेक्शन था। इसके कारण स्पाइनल कॉर्ड पर भारी दबाव पड़ रहा था। मरीज के बाएं पैर और घुटने के नीचे की ताकत लगातार कम हो रही थी। डॉक्टरों के मुताबिक, अगर समय पर ऑपरेशन न होता तो दोनों पैरों में पैरालिसिस (Paralysis) का खतरा था।
टाइटेनियम स्क्रू से फिक्स हुई रीढ़ की हड्डी
मरीज की हालत देखते हुए तुरंत सर्जरी का फैसला लिया गया। न्यूरोसर्जन डॉ. विनोद कुमार तिवारी की अगुवाई में ऑपरेशन शुरू हुआ। यह सर्जरी बेहद संवेदनशील थी। नसों को थोड़ी सी भी चोट लगने पर लकवा स्थायी हो सकता था।
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डॉक्टरों ने बेहद सावधानी से करीब दो घंटे तक ऑपरेशन किया। रीढ़ की हड्डी को सहारा देने के लिए L2-L4 स्पाइनल फिक्सेशन किया गया। इसमें टाइटेनियम स्क्रू (Titanium screws) और रॉड का इस्तेमाल हुआ।
प्राइवेट में आता 3 लाख का खर्च
डॉ. तिवारी ने बताया कि प्राइवेट अस्पतालों में इस जटिल सर्जरी का खर्च करीब 3 लाख रुपये आता है। आम परिवारों के लिए इतना बड़ा खर्च उठाना मुश्किल होता है। सिविल अस्पताल में यह सुविधा शुरू होने से आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को सीधे तौर पर फायदा मिलेगा।
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मरीज के पैरों में लौटने लगी ताकत
सर्जरी के बाद विनय तिवारी की हालत संतोषजनक है। उन्हें न्यूरोसर्जरी वार्ड में रखा गया है। डॉक्टरों के मुताबिक, मरीज के पैरों में ताकत वापस आनी शुरू हो गई है। वह अब दोनों पैरों को चला पा रहा है। मरीज की पत्नी सोनी तिवारी ने समय पर इलाज के लिए अस्पताल के डॉक्टरों का आभार जताया है।
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इन डॉक्टरों की टीम का रहा अहम रोल
इस जटिल ऑपरेशन में एनेस्थीसिया विभाग के प्रमुख डॉ. सुनील कुमार सिंह की टीम का अहम रोल रहा। उनके साथ डॉ. राजेश और डॉ. कासिम मौजूद रहे। सिस्टर पूजा और किरण ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. डी.सी. पांडे और अधीक्षक डॉ. शिवराज सिंह ने पूरी मेडिकल टीम के प्रयासों की सराहना की है।




