Lucknow: हार्ट डिजीज से ग्रसित महिलाओं के सुरक्षित प्रसव के लिए आईसीएमआर (Indian Council of Medical Research) एक प्रोटोकाल ((Protocol)) तैयार कर रहा है। यदि किसी महिला को हार्ट सम्बन्धी समस्या है तो इसी प्रोटोकाल के तहत सुरक्षित गर्भधारण व गर्भावस्था प्रबंधन किया जायेगा। इसके लिए लॉरी कॉडियोलॉजी व क्वीनमैरी विभाग मिलकर काम कर रहे हैं।
अटल बिहारी वाजपेई साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में आयोजित कॉर्डिकॉन-2026 के दौरान लारी कॉर्डियोलॉजी विभाग की प्रो. डा. मोनिका भंडारी (Dr. Monika Bhandari) ने बताया कि करीब एक साल से ह्दय रोग से ग्रसित गर्भवती महिलाओं पर दोनों विभाग मिलकर स्टडी कर रहे हैं। स्टडी के दौरान यह देखा जा रहा है कि गर्भवस्था के दौरान हार्ट की समस्या होने या पहले से यदि किसी महिला को यह दिक्कत हैं तो उसका किस प्रकार सुरक्षित प्रसव कराया जा सकता है। गर्भावस्था में ऐसी कौन की दवाएं दी जाये तो बिना किसी साइड इफेक्ट से गर्भवती को लाभ पहुंचायें। उन्होंने बताया कि स्टडी के बाद जल्द ही इसकी गाइडलाइन तैयारी की जायेगी और उसी के आधार पर प्रोटोकाल बनाकर इलाज किया जायेगा।
शादी से पहले करायें दिल का इलाज
किसी महिला को यदि दिल से जुड़ी समस्या है, तो उसे शादी से पहले इसकी पूरी जांच और उपचार कराना बेहद जरूरी है। बीमारी को छुपाना न केवल महिला के लिए बल्कि आने वाले बच्चे के लिए भी जोखिम भरा हो सकता है। यह कहना है कार्डियोलॉजिस्ट डा. मोनिका भंडारी का। उन्होंने बताया कि हृदय रोग से पीडि़त महिला यदि बिना उचित परामर्श के गर्भधारण करती है, तो गर्भावस्था के दौरान जटिलताएं बढ़ सकती हैं। गर्भावस्था में शरीर में खून की मात्रा और दिल की कार्यक्षमता पर दबाव बढ़ जाता है, जिससे हृदय समस्या गंभीर रूप ले सकती है। इसके अलावा मां में हार्ट सम्बन्धी समस्या होने से बच्चे की सेहत पर भी इसका असर पड़ता है।
यदि माता या पिता में से किसी एक को जन्मजात हृदय रोग है, तो बच्चे में भी इसके होने की संभावना सामान्य से अधिक हो सकती है। और यदि दोनों ही माता-पिता को जन्मजात हृदय संबंधी समस्या रही है, तो जोखिम और बढ़ जाता है। डा. भंडारी का कहना है कि गर्भधारण की योजना बनाने से पहले महिला को किसी अनुभवी कार्डियोलॉजिस्ट से परामर्श लेना चाहिए। जांच के आधार पर डॉक्टर यह तय करते हैं कि गर्भधारण सुरक्षित है या पहले इलाज की जरूरत है।
सुरक्षित मातृत्व के लिए क्या करें
– शादी से पहले पूरी मेडिकल जांच करायें
– दिल की बीमारी होने पर नियमित फॉलोअप रखें
– गर्भधारण से पहले कार्डियोलॉजिस्ट और स्त्री रोग विशेषज्ञ दोनों से परामर्श लें
– स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं और संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और तनाव से दूरी
– परिवार में हृदय रोग का इतिहास हो तो विशेष सावधानी बरतें
