Health

यूपी में स्वास्थ्य सेवाओं का बड़ा विस्तार: 5 साल में बनेंगे 5000 नए ट्रॉमा बेड, इमरजेंसी में 48 घंटे मुफ्त इलाज

उत्तर प्रदेश में ट्रॉमा और इमरजेंसी सेवाओं को विश्वस्तरीय बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। प्रदेश भर में ट्रॉमा सेंटर्स का एक व्यापक जाल बिछाया जाएगा, जिससे दुर्घटना और आपातकालीन स्थिति में मरीजों को तुरंत बेड और जीवन रक्षक इलाज मिल सके। नई योजना के तहत, अगले पांच वर्षों में राज्य में ट्रॉमा और इमरजेंसी सेवाओं के लिए लगभग 5000 अतिरिक्त बेड विकसित किए जाएंगे। इन नए बेड्स में गंभीर मरीजों के लिए आईसीयू (ICU) और वेंटिलेटर की सुविधा भी मुख्य रूप से शामिल होगी।

कार्यशाला में तैयार हुई रूपरेखा

हाल ही में ट्रॉमा केयर पर आयोजित एक उच्च स्तरीय कार्यशाला में विशेषज्ञों ने इस योजना के तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं पर चर्चा की। केजीएमयू (KGMU) ट्रॉमा सेंटर के सीएमएस डॉ. प्रेम राज सिंह ने स्पष्ट किया कि बेड की संख्या बढ़ने से गंभीर मरीजों को भर्ती करने में आने वाली दिक्कतें दूर होंगी। उन्होंने सड़क हादसों में कमी लाने के लिए यातायात नियमों के कड़ाई से पालन पर जोर दिया। उनका कहना है कि दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट और कार में सीट बेल्ट का इस्तेमाल हादसों में जानमाल के नुकसान को काफी हद तक कम कर सकता है।

चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने बताया कि राज्य में ट्रॉमा नेटवर्क को मजबूत बनाने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। उन्होंने बताया कि केवल बुनियादी ढांचा या भवन निर्माण ही काफी नहीं है, बल्कि इस नेटवर्क को सफलतापूर्वक चलाने के लिए डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और नर्सिंग कर्मियों का विशेष प्रशिक्षण भी बेहद जरूरी है। इस पूरी प्रक्रिया में सभी विभागों की सहभागिता सुनिश्चित की जा रही है।

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हेलमेट नियमों में सख्ती की सिफारिश

नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने सड़क सुरक्षा को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए सुझाव दिया कि मोटरसाइकिल पर पीछे बैठने वाले व्यक्ति (Pillion Rider) के लिए भी हेलमेट पहनना पूरी तरह से अनिवार्य किया जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन नियमों में किसी भी प्रकार की ढील नहीं दी जानी चाहिए। दुर्घटना के बाद ट्रॉमा के मरीजों के लिए शुरुआती समय (Golden Hour) में समुचित इलाज मिलना जीवन रक्षक होता है, इसलिए नियमों का पालन और त्वरित इलाज दोनों आवश्यक हैं।

योजना के प्रमुख बिंदु:

  • राज्यव्यापी नेटवर्क: यूपी में ट्रॉमा और इमरजेंसी सेवाओं का एक मजबूत राज्यव्यापी नेटवर्क (Statewide Network) विकसित किया जाएगा।

  • एकीकृत मॉडल: ट्रॉमा, इमरजेंसी और बर्न केयर सेवाओं को मिलाकर एक इंटीग्रेटेड मॉडल (Integrated Model) तैयार किया जाएगा।

  • फर्स्ट रिस्पॉन्स सेंटर: राजमार्गों (Highways) पर स्थित अस्पतालों और सीएचसी (CHC) को ‘फर्स्ट रिस्पॉन्स सेंटर’ के रूप में अपग्रेड किया जाएगा ताकि हादसों के तुरंत बाद प्राथमिक उपचार मिल सके।

  • टेली-मेडिसिन: डिजिटल प्लेटफॉर्म और टेली-मेडिसिन के जरिए छोटे केंद्रों पर भी बड़े विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा।

  • मुफ्त इलाज: सबसे अहम कदम के रूप में, किसी भी दुर्घटना या इमरजेंसी की स्थिति में मरीज को शुरुआती 48 घंटे तक मुफ्त इलाज (Free Treatment) की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।

Sunil Yadav

संपादक, लेखक और अनुभवी पत्रकार हैं। वे दैनिक जागरण, आईनेक्‍स्‍ट, कैनविज टाइम्‍स और दैनिक जागरण आईनेक्‍स्‍ट से जुड़े रहे हैं। वह मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश की राजनीति, प्रशासनिक ख़बरों, स्वास्थ्य सेवाओं, टेक्‍नोलॉजी से जुड़े विषयों पर लिखते हैं। ट्विटर (X) पर उनसे @sunilyadav21 पर जुड़ सकते हैं।

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